राजीव त्यागी कांग्रेस पार्टी के सिर्फ एक स्पोक पर्सन नहीं थे, जिंदादिल इंसान भी थे.
कांग्रेस पार्टी की विचारधारा से दिल से जुड़े हुए व्यक्ति थे, राजीव त्यागी का आकस्मिक निधन कांग्रेस पार्टी के लिए बहुत बड़ी क्षति है. अक्सर हम सभी लोग राजीव त्यागी को टीवी डिबेट में विभिन्न मुद्दों पर अपना पक्ष रखते हुए देखा करते थे. कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं समर्थकों के अलावा विपक्षी पार्टियों के समर्थकों में भी उनकी फैन फॉलोइंग अच्छी थी, क्योंकि राजीव त्यागी एक नेक जिंदादिल मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे.
एक वह दौर था जब टीवी डिबेट में विपक्षी पार्टियों के प्रवक्ताओं को कोई तवज्जो नहीं मिलती थी, कोई गिनती नहीं होती थी. उस दौर में भाजपा के तमाम प्रवक्ता मीडिया चैनलों के एंकरो के साथ मिलकर विपक्षी पार्टियों को बदनाम करते रहते थे, विपक्षी पार्टियों के प्रवक्ताओं की आवाज दबाते रहते थे. बोलने नहीं दिया जाता था, उनको उनकी बात कहने का मौका नहीं दिया जाता था, उस दौर में राजीव त्यागी ने विपक्षी पार्टियों को मीडिया चैनलों में अपने प्रवक्ताओं को भेजने का एक तरह से हौसला दिया.
जिस दौर में मीडिया चैनलों के एंकर सत्ताधारी पार्टी यानी भाजपा के प्रवक्ता बने हुए थे या हैं, उस दौर में राजीव त्यागी अपनी बुलंद आवाज को मीडिया चैनलों की डिबेट के माध्यम से जनता के बीच दर्ज करा रहे थे. जिस समय तमाम नेता और कांग्रेस से जुड़े हुए लोग पार्टी छोड़कर सत्ताधारी पार्टी की गुलामी स्वीकार कर रहे थे या कर रहे हैं, ऐसे समय में राजीव त्यागी कांग्रेस पार्टी से जुड़े हुए अपने दोस्तों समर्थकों और कार्यकर्ताओं से कहा करते थे की पार्टी मां होती है और मां को मुसीबत के वक्त छोड़ा नहीं जाता, हम लड़ेंगे भिड़ेंगे और फिर जीतेंगे.
एक बार राजीव त्यागी जी ने राष्ट्रवाद की परिभाषा भाजपा को बताई थी
हमारा राष्ट्रवाद था संवैधानिक संस्थाओं को हमने बचा कर रखा, हमारा राष्ट्रवाद था जो बड़े बड़े डैम बनाए, हमारा राष्ट्रवाद था जो हरित क्रांति लेकर आए, हमारा राष्ट्रवाद था जो श्वेत क्रांति लेकर आए, हमारा राष्ट्रवाद था जो कंप्यूटर और आईटी लेकर आए. हमारा राष्ट्रवाद था जो पंचायती राज व्यवस्था लेकर आए. हमारा राष्ट्रवाद था जिसने दल बदल कानून बना रोकने का काम किया, हमारा राष्ट्रवाद था जो 18 साल के नौजवानों को रोजगार देने का काम किया. हमारा राष्ट्रवाद था जिसने आर्थिक उदारीकरण किया.
हमारा राष्ट्रवाद था जिसने नौजवानों को अधिकार देने का काम किया और लोगों को अधिकार देने का काम किया, उनको राइट टू फूड लेके, मनरेगा से लेके, राइट टू वर्क से लेके हर चीज देने का काम किया हमारा राष्ट्रवाद था कि हमने चौथे नंबर की फौज थी और पाकिस्तान के दो टुकड़े किए हमारी संस्कृति थी देश पर प्राण न्यौछावर करिये- महात्मा गांधी से ले के, इंदिरा गांधी से ले के, राजीव गांधी तक सबने अपने प्राण बलिदान किए.
कांग्रेस का समर्थन कर रहे लोगों का मनोबल हमेशा राजीव त्यागी ऊंचा रखते थे. जिससे भी बात करते थे उसको कभी निराश न होने की सीख देते थे. कहने को तो राजीव त्यागी कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता थे, लेकिन वह लगातार कांग्रेस कैसे मजबूत हो इसके लिए अलग- अलग तरीके से लोगों की राय लेकर उस पर इंडिविजुअली काम करते रहते थे. कुछ दिन पहले उन्होंने अपने स्तर पर बिना पार्टी के कहे, लोगों को पार्टी से जोड़ने का, लोगों के बीच पार्टी की विचारधारा का विस्तार करने का बीड़ा अपने कंधों पर उठाया था.
इसी के तहत उन्होंने जनता के बीच जाकर उनसे मिलने, उनसे बात करने का सिलसिला भी शुरू किया था. कांग्रेस पार्टी को युवा वर्ग के बीच ले जाने के लिए उन्होंने लोगों के घर-घर जाकर लोगों से बात करना उनकी समस्याओं को सुनना और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए उन्हें आश्वस्त करना शुरू कर दिया था. पिछले दिनों उन्होंने हजारो लोगों के घर जाकर उनसे मुलाकात की थी. वह लगातार कांग्रेस के लिए समर्पित व्यक्ति थे. सोशल मीडिया के माध्यम से वह हजारों लोगों के संपर्क में हमेशा रहते थे. सोशल मीडिया के माध्यम से भी वह नए नए लोगों से बात करते रहते थे. जूम एप के द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के थ्रू भी पिछले दिनों उन्होंने हजारों लोगों से बात की थी.
राजीव त्यागी की कार्यशैली और उनकी व्यक्तिगत छवि से अनेकों लोग प्रभावित थे. जिस दौर में मीडिया चैनलों पर विपक्षी पार्टी के प्रवक्ताओं को शो पीस की तरह देखा जाता था उस दौर में राजीव त्यागी बब्बर शेर की तरह दहाड़ कर अपनी बात रखते थे.
राजीव त्यागी एक ब्राह्मण परिवार से आते थे जिस समय उनका निधन हुआ उससे ठीक पहले वह आज तक के दंगल कार्यक्रम में कांग्रेस पार्टी की तरफ से अपनी बात रख रहे थे. उसी समय भाजपा के बदनाम प्रवक्ता संबित पात्रा ने उन्हें कई बातों पर पर्सनली अटैक किया. राजीव त्यागी खुद ब्राह्मण थे, लेकिन संबित पात्रा ने उनके हिंदू होने पर सवाल उठाया. बीते हुए कल यानी जिस दिन राजीव त्यागी का निधन हुआ उस दिन देश के कई हिस्सों में जन्माष्टमी मनाई गई राजीव त्यागी ने भी शायद पूजा पाठ करने के बाद ललाट पर तिलक लगाया हुआ था. डिबेट देखने वालों ने यह बात गौर की होगी, उसी को लेकर संबित पात्रा ने कहा था कि तिलक लगाने से कोई हिंदू नहीं हो जाता, तिलक लगाना है तो दिल पर लगा, कुल मिलाकर देखा जाए तो संबित पात्रा का हमेशा प्रयास विपक्षी पार्टियों से जुड़े हुए लोगों को नकली हिंदू बताने का रहता, ताकि उस व्यक्ति को अपमानित किया जा सके, उसे उत्तेजित किया जा सके और इस काम में संबित पात्रा का बखूबी साथ देते हैं टीवी चैनल पर बैठे एंकर.
चैनल पर एंकरिंग कर रहा व्यक्ति विपक्षी पार्टी के प्रवक्ता को जवाब तक नहीं देने देता. बात बीच में काट दी जाती है, उसका माइक बंद कर दिया जाता है, ऐसी परिस्थिति में विपक्षी पार्टी का प्रवक्ता अपमानित महसूस करता है घुटन महसूस करता है और शायद कल की डिबेट में राजीव त्यागी के साथ भी यही हुआ होगा. कई बार किसी को अपमानित किया जाता है तो वह व्यक्ति इग्नोर कर जाता है, लेकिन अगर घर वालों के सामने किसी को अपमानित किया जाए और उसके बाद उसे जवाब देने का मौका भी उस मुद्दे पर न मिले तो कई बार ऐसी बातें व्यक्ति दिल पर ले लेता है. राजीव त्यागी की डिबेट उनके बच्चे और उनकी पत्नी दूसरे कमरे में सुन रहे थे. शायद यह बात भी राजीव त्यागी के माइंड में रही होगी.
ऐसी परिस्थिति जानबूझकर संबित पात्रा जैसे प्रवक्ताओं और उनका साथ दे रहे एंकरो के द्वारा बनाई जाती है ऐसी स्थिति में किसी का ब्लड प्रेशर बढ़ जाए उसे दिल का दौरा पड़ जाए उसका जिम्मेदार कौन है? किसी हिंदू को, किसी ब्राह्मण को उसके द्वारा ललाट पर लगाए गए तिलक पर सवाल उठा रहे हो, उसको नकली हिंदू बता रहे हो उसको लगातार अपमानित कर रहे हो उसके बाद भी एंकर द्वारा राजीव त्यागी का माइक बंद कर दिया जाता है. बोलने का पूरा मौका नहीं दिया जाता है, उस समय राजीव त्यागी के जेहन पर क्या बीती होगी?
देश के अंदर मीडिया चैनलों द्वारा बनाए जा रहे माहौल और राजीव त्यागी के आकस्मिक निधन पर अंत में सिर्फ इतना कहना है कि, यह कोई सामान्य घटना नहीं है इसके पीछे एक ऐसा जहर काम कर रहा है जो रोज शाम को शुरू होता है चीख-चिल्लाहट, पर्सनल अटैक, गाली, धमकी तक पहुंचता है और यह जहर सिर्फ इसलिए फैलाया जा रहा है ताकि चैनल की टीआरपी हाई रहे और उस टीआरपी के माध्यम से एक पार्टी विशेष को सत्ता पर बने रहने के लिए जरूरी ऑक्सीजन मिलता रहे.








1 Comments
राजीव त्यागी जी को सुनना अच्छा लगता था। आपका असमय जाना देश एवम् राजनीति के लिए हमेशा दुखद रहेगा। कांग्रेस पार्टी ने एक बहुत ही जुझारू एवम् सटीक नेता खोया है, इसकी भरपाई बहुत कठिन है।
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